जुल्म के शिकार लोगों के नक्सली बनने की दास्तां अक्सर सामने आती है। पर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के चलगली इलाके में दहशत का नाम बन चुके नक्सली जोनल कमांडर सीताराम की कहानी ऐसे इंसान के तौर पर सामने आई, जो इश्क में कई बार नाकाम हुआ। कहानी जानने के लिए भास्कर टीम उसके गांव बादा पहुंची।
सीताराम के पिता गांव के कोटवार (गांव में लोगों के चरित्र की जानकारी प्रशासन को देने वाले) हैं। जब भी अफसरों को गांव में काम होता, वह सबसे पहले उनकी मदद के लिए आगे आता। ऐसे माहौल, शादीशुदा और पिता बन चुके सीताराम ने हथियार उठा लिए। उसकी पांचवीं प्रेमिका-पत्नी और भाई श्रीराम ने बचपन में शालीन रहे सीताराम के नक्सली बनने और 15 साल बाद गांव लौटने की कहानी बयां की...
सीताराम को जिंदगी में 5 लड़कियों से प्यार हुआ। पहली बेवफा निकली। दूसरी के प्रेमी ने उसके खिलाफ नक्सलियों के कान भर दिए। तब उसे जन अदालत में बुलाया गया। यहींं उसने नक्सलियों का रौब देखा। इससे प्रभावित होकर वह नक्सली बन बैठा। दूसरी से रिश्ता टूटा तो दो और लड़कियों से दिल लग गया, पर उन्होंने भी दगा ही दिया। प्यार में नाकाम होकर जान देने के लिए फंदे पर लटक गया। ऐन मौके पर छोटे भाई ने पहुंचकर बचा लिया। फिर डकैती के आरोप में जेल चला गया।
जमानत पर लौटा तो 10वीं की छात्रा को दिल दे बैठा। बाद में उसे सीताराम के दहशतगर्द होने का पता चला। लड़की को लगा कि ऐसे आदमी से आतंक बढ़ेगा और लोगों की जान जाएगी। खुद पुलिस की गोली का शिकार बन सकता है। इसी आशंका में उसने सीताराम से कहा कि तुम्हें मुझे या बंदूक में से एक को चुनना होगा। इस पर सीताराम ने बंदूक साथी को थमा दी। वह 2000 रुपए लेकर गांव जाने के बहाने लड़की के साथ असम चला गया। वहां दोनों ने शादी कर ली और नाम बदलकर रहने लगे। सीताराम जहां सब्जी बेचता था, वहीं मकान बना लिया।
अचानक लॉकडाउन लगा तो 15 साल बाद घर की याद आई। डाक से घर फोन नंबर भेजा। घरवालों ने फोन लगाया तो कोई असमिया में बोल रहा था। इसके बाद वह टूटी फूटी हिंदी में वह खुद को सीताराम बताने लगा। इस पर एक महीने बाद भरोसा हुआ। उसके बाद पुलिस और सरकार को मैंने सीताराम के बारे में बताया। असम से आकर उसने सरेंडर कर दिया।
सरेंडर कर चुके सीताराम का बेटा बनना चाहता है विंग कमांडर
श्रीराम का कहना है कि सीताराम 15 साल से लापता था। हम उसके सांकेतिक अंतिम संस्कार तैयारी कर रहे थे। असम में उसकी प्रेमिका पत्नी ने 2006 में एक बच्चे को जन्म दिया। अब वह 9वीं में असम में ही पढ़ता है। उसकी मां ने बताया कि वह एनसीसी कैडेट है। अब वह वायुसेना में विंग कमांडर बनना चाहता है। उसके बेटे को यह भी नहीं पता कि पापा नक्सली कमांडर रह चुका है। सीताराम की पहली पत्नी का बेटा है, जो 29 साल का हो चुका है और उसकी शादी होने वाली है।
