मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में नक्सलमुक्त बस्तर की नई तस्वीर: बस्तर की धरती पर लौटती उम्मीद
• devendra kumar
रायपुर। छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र कभी नक्सल हिंसा, डर, अविश्वास और विकास से दूर रहने के लिए जाना जाता था. घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और सीमित संपर्क व्यवस्था के कारण यहाँ शासन-प्रशासन की मौजूदगी भी कमजोर थी. स्कूल बंद रहते थे, सड़कें अधूरी थीं, स्वास्थ्य केंद्र वीरान थे, और आमजन का जीवन भय के साए में गुजरता था. लेकिन आज प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में उसी बस्तर ने करवट ली है.
नक्सलमुक्त ग्रामों की नई तस्वीर पूरे देश के सामने एक प्रेरक कहानी बनकर उभर रही है. सुकमा जिले का बड़ेसट्टी गांव बस्तर संभाग की पहली नक्सल-मुक्त ग्राम पंचायत घोषित होना इस बदलाव का ऐतिहासिक प्रमाण है. यह केवल एक गांव की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बस्तर की नई पहचान की शुरुआत है. यह सफलता सुरक्षाबलों के साहस, स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग और राज्य सरकार की सशक्त, संवेदनशील एवं दूरदर्शी नीतियों का प्रतिफल है.
नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में ऐतिहासिक कमी- साय सरकार की कोशिशें पा रही सफलता
राज्य सरकार के अनुसार पहले जहां छत्तीसगढ़ में छह जिले गंभीर रूप से नक्सल प्रभावित थे, वहीं अब यह संख्या घटकर केवल तीन – बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर – तक सिमट गई है. यह गिरावट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि जमीन पर हुई ठोस कार्यवाही और सतत विकास प्रयासों का परिणाम है.
मुख्यमंत्री श्विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया है कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक पूरे छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाना है, और यह लक्ष्य अब दूर नहीं है. जिस तेजी और संकल्प के साथ कार्य हो रहा है, उससे यह स्पष्ट है कि बस्तर अब हिंसा नहीं, शांति और विकास की ओर बढ़ रहा है.इस सिलसिले में राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 100 से अधिक बार बस्तर की यात्रा कर ली है.
