कोस-कोस पर बदले पानी… आगे की लाइन भूल गए MLA पुरंदर, दर्शकों ने लगाए जोरदार ठहाके, जानें पूरी कहावत का अर्थ
• devendra kumar
राजभाषा दिवस समारोह के मंच पर उस समय माहौल हल्का-फुल्का हो गया, जब विधायक पुरंदर मिश्रा भाषण देते हुए मशहूर कहावत “कोस-कोस पर बदले पानी…” के आगे की लाइन भूल गए। मुस्कुराते हुए उन्होंने खुद ही कहा- “अधूरा रह गया, अगले साल पूरा करके सुनाऊंगा।” उनके इस अंदाज़ पर पूरा ऑडिटोरियम ठहाकों से गूंज उठा।
संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में आयोजित राजभाषा दिवस समारोह में विधायक पुरंदर मिश्रा मंच पर पहुंचे और भाषण के दौरान एक कहावत बीच में भूल जाने पर स्वयं ही मुस्कुराते हुए बोले- अधूरा रह गया, अगले साल पूरा करके सुनाऊंगा। दरअसल, वे छत्तीसगढ़ी के अलग-अलग स्वरूप पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि कोस-कोस पर बदले पानी। आगे की लाइन वे मंच संचालक अमित मिश्रा से पूछने लगे। वे नहीं बता पाए तो सामने बैठे साहित्यकारों से पूछा। जवाब नहीं आने पर कहने लगे अगले साल इसी कार्यक्रम में बताऊंगा। इतना सुनते ही ऑडिटोरियम में ठहाके लगने लगे। कार्यक्रम में संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, विधायक अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन और संस्कृति संचालक विवेक आचार्य मौजूद थे।
