दोस्ती वहाँ खत्म होती है जहाँ स्वार्थ शुरू होता है और भारत–रूस की दोस्ती वहाँ से शुरू होती है जहाँ दिल बोलता है यानि तुम खुश तो मैं खुश
हमारे यहां पर एक कहावत है जोड़ी ऊपर वाला बनाता है वैसे ही भारत और रूस की जोड़ी बनाई गई है, जो अटूट भी है और प्रेम ऐसा मानो की हर कोई यही चाहता है ऐसी जोड़ी हमारे साथ भी हो। जहाँ हथियार, व्यापार, तेल, सौदे सिर्फ पन्ने है, पर पूरा ग्रंथ दिल और भरोसे से लिखा है। आज की दुनिया में दोस्ती शब्द हल्का हो गया है। पर अगर दोस्ती को समझना हो तो भारत और रूस के रिश्ते को देख कर समझा जा सकता है। जहाँ डर नहीं, लोभ नहीं, शर्त नहीं अगर सबकुछ है तो वो सिर्फ और सिर्फ निस्वार्थ साथ है। दोस्ती क्या है? “संकट में साथ, समृद्धि में सम्मान, और मन से मन का निस्वार्थ रिश्ता ही दोस्ती कहलाता है।” यह दो सभ्यताओं का आपस में भाई बनना है। दुनिया हमें हमेशा MIG, S-400, ब्रह्मोस की दोस्ती दिखाती रही। पर वो नहीं दिखाती कि दिल कहाँ मिले थे, भरोसा कहाँ खड़ा हुआ था, और कब-कब ऐसा हुआ जब बाकी दुनिया दूर खड़ी थी पर भारत और रूस एक-दूसरे के लिए ढाल बनकर खड़े थे। जब दुनिया ने भारत का साथ नहीं दिया — पर रूस चट्टान बनकर खड़ा रहा 1. 1971 का युद्ध — जब पूरी दुनिया पाकिस्तान के साथ थी अमेरिका, ब्रिटेन, चीन तीनों पाकिस्तान के पक्ष में खड़े थे।अमेरिका ने तो न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर भेज दिया भारत को डराने के लिए। ब्रिटेन,चीन भी भारत के खिलाफ खड़े हो गए थे तब रूस ही अपना मित्र था जिसने- ✔ परमाणु पनडुब्बियाँ भारतीय नौसेना के समर्थन में भेज दीं ✔ UN में 3 बार भारत के लिए वीटो लगाया ✔ अमेरिका–ब्रिटेन को साफ चेतावनी दी “भारत के खिलाफ एक भी कदम = रूस का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप होगा।” 2. कश्मीर मुद्दे पर दुनिया भारत के खिलाफ थी — रूस दीवार बन गया सालों तक अमेरिका–ब्रिटेन–पाकिस्तान UN में भारत के खिलाफ प्रस्ताव लाते रहे। लेकिन हर बार रूस ने कहा: “कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है। यह सिर्फ “समर्थन” नहीं था यह भारत की सार्वभौमिकता की रक्षा थी। 3. 1998 परमाणु परीक्षण — सबने पाबंदी लगाई, रूस ने नहीं अमेरिका, यूरोप, जापान सबने प्रतिबंध लगाए। पर रूस ने भारत पर एक भी प्रतिबंध नहीं लगाया अपितु उल्टा परमाणु तकनीक और सहयोग बढ़ाया। यह दोस्ती नहीं यू कहे बड़े भाई का भरोसा था। 4. S-400 का मामला — जब अमेरिका डराने लगा NATO ने साफ कहा — “इसे किसी को नहीं देंगे ऐसी टेक्नोलॉजी।” लेकिन रूस ने भारत को दुनिया का सबसे श्रेष्ठ एयर-डिफेंस सिस्टम दिया। ब्रह्मोस टेक्नोलॉजी शेयर की जो अमेरिका भी इस तरह की टेक्नोलॉजी किसी को नहीं देता।
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