बदल गई मोदी की रायपुर अभनपुर मेमू ट्रेन, यात्री बोले, 'फिर भी 10 रु में है फायदे की सवारी'
रायपुर: छत्तीसगढ़ में रायपुर अभनपुर मेमू ट्रेन की शुरुआत 30 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जारिए हरी झंडी दिखाकर किया. करीब ढाई महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है. इन ढाई महीनों में ट्रेन को कैसा रिस्पांस मिल रहा है. ट्रैन में सुविधाएं, यात्रियों का एक्सपीरियंस जानने के लिए ईटीवी भारत की टीम ने इस ट्रेन से रायपुर से अभनपुर और फिर अभनपुर से रायपुर की यात्रा की.
बदल गई मेमू ट्रेन: रायपुर अभनपुर मेमू ट्रेन में सफर करने के लिए सबसे पहले ईटीवी भारत की टीम ने रायपुर रेलवे स्टेशन पर रायपुर से अभनपुर का टिकट लिया. एक व्यक्ति का किराया 10 रुपये है. फिर प्लेटफर्म नम्बर 7 से रायपुर अभनपुर मेमू ट्रेन में सवार हुए.
ट्रेन के अंदर गिने चुने यात्री सवार थे. पूरी ट्रेन लगभग खाली थी. ट्रेन का स्वरूप भी बदला नजर आ रहा था. न तो यह ट्रेन सर्वसुविधायुक्त थी, न ही इसमें मोबाइल चार्जिंग पॉइंट थे, न ही इसमें स्टेशन की जानकारी देने के लिए कोच में डिस्प्ले स्क्रीन लगी थी. इसमें सीसीटीवी भी नहीं लगा था.
सर्वसुविधायुक्त थी मोदी की मेमू ट्रेन: जिस मेमू ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था, यह वह ट्रेन नहीं थी. उस ट्रेन में कई आधुनिक सुविधायें थीं. प्रत्येक कोच में अच्छा इंटीरियर, कुशन वाली सीटें, बड़ी बड़ी खिड़कियां, स्लाइडिंग दरवाजे और मोबाइल चार्जिंग सॉकेट उपलब्ध था. डिस्प्ले स्क्रीन और लाउडस्पीकर प्रत्येक कोच में लगाए गए, जो यात्रियों को स्टेशन की जानकारी देते थे. ट्रेन में सीसीटीवी लगे थे. हर ट्रेलर कोच में पर्यावरण-अनुकूल बायो-टॉयलेट्स की सुविधा थी.
10 रु किराया, यात्रियों को फायदा: यात्रियों ने बताया यह ट्रेन लोगों की सहूलियत के लिए चलाई गई. ट्रेन का फायदा मिल रहा है, लेकिन जिस दिन इस ट्रेन को शुरू किया गया था, वह ट्रेन सर्व सुविधायुक्त थी. उसमें सारी व्यवस्थाएं थी, वह नई ट्रेन थी, लेकिन अब जो मेमू ट्रेन चलाई जा रही है, वह दूसरी ट्रेन है. इसमें पहले जैसा तामझाम और सुविधा नहीं है, बावजूद इसके यात्री इस ट्रेन से खुश हैं. क्योंकि उन्हें रायपुर से अभनपुर के लिए मात्र ₹10 किराया देना पड़ रहा है. अभनपुर से रायपुर के लिए भी ₹10 ही खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि पहले बस और अन्य साधनों से जाने के लिए उन्हें कहीं ज्यादा राशि खर्च करनी पड़ती थी.